सूर्यास्त

आँखों के समंदर में सपनों का सूर्यास्त हुआ 

वीराने मेरे इस जीवन का किनारा भी वीराना हुआ 


अपने ही लहरों से बचकर भागता ,

मैं उस किनारे को पाने 

पर किनारे भी हर पल दूर भागते 

मुझमे है नीर या हलाहल, सोचने को मजबूर करते || 

Comments