जहाँ - ना - बाद

वक़्त है यही सही 
वक़्त से डरो नहीं

धरा कर रही तुम्हे पुकार
लहू पी करती चीत्कार 
प्यास अभी  बुझी नहीं?
खून  चाहिए और अभी!

सोच सोच दिमाग हो गया निढाल 
मन विह्वल और दिल फटेहाल 
कब तक करेगा यह तांडव काल!
कब तलवार को रोकेगी ढाल 

कब लोगों की मति जागेगी 
खून की होली कब ख़त्म होगी

क्या इतिहास फिर दोहराएगा 
क्या बिहार खोया गौरव पायेगा?
क्या मनुष्य जाती से उठ पायेगा 
शायद जहाँ - ना - आबाद हो पायेगा  

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